पाइल्स का योग द्वारा उपचार

पाइल्स के लिए योग

 
बवासीर या हेमोर्रोइड्स के लिए योगासन  कुछ रोग ऐसे होते है जो व्यक्ति किसी को बता भी नही सकता और अंदर ही अंदर लाज शर्म के घुटता रहता है । इन्ही में से एक रोग है पाइल्स का रोग जो रोगी की हालत खराब कर देता है । पाइल्स के लिए योग से उपचार संभव हे.

शौच जाते समय असहनीय पीड़ा खून का लगातार निकलना मस्सो का बाहर निकल आना दिनभर कांटो जैसी चुबन गुदा मार्ग में होना यह सब पाईल्स के रोगियों के साथ होने वाली प्रमुख परेशानी है ।

पाइल्स का योग द्वारा उपचार-

परेशान होकर लोग तरह तरह की दवा खाते है उपचार करवाते है लेकिन पाईल्स जाने का नाम नही लेता । तेज मिर्च का खाना तेज मसाले का खाना अधिक तला खाना बासी खाना यह सब हम भारतीयों की आम आदतों में शुमार है यही कारण है कि भारत मे हर तीसरा व्यक्ति या तो कब्ज से या पाईल्स से पीड़ित है ।

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सुबह सुबह व्यक्ति जब खुद के खून को मल द्वार से निकलता देखता है तो बेहद बैचेन ओर कमजोर हो जाता है । लेकिन घबराने की जरूरत नही है सही दैनिक दिनचर्या एवं सही खानपान एवं योग करने से आप इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म कर सकते है । अधिक दवाब से मल त्याग करने के कारण मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं ।

नीचे दिए गए प्रमुख योगासन गुदा की मांसपेशियों को खिंचाव और मांसपेशियों के संकुचन में बेहद मददगार  हैं। यदि योग के साथ साथ लाइफ स्टाइल में सुधार किया जाए तो योग गुदा को कोमल और शिथिल रखने में मददगार सिद्ध होगा। पाइल्स का सबसे प्रमुख कारण है । लंबे समय से खराब रहे पाचन तंत्र का होना ।

  योग के माध्यम से इसी समस्या को जड़मूल से खत्म करने पर ध्यान दिया जा सकता है। यदी समय रहते हम सचेत नही होते तो हमे इसका ऑपरेशन तक कराना होता है । यह कैंसर का रूप भी धारण कर सकता है । जिन्हें पाईल्स ने जकड़ लिया वो शौच जाने के नाम से भी घबराने लगते है ।

पाईल्स का एक ओर बड़ा कारण है तनाव योग से आप मानसिक रूप से पीड़ित रोगी मजबूत बनते है एवं तनाव रहित जीवन जीते है । पाईल्स वंशानुगत भी रहती है । शरीर मे फायबर की कमी हो जाने से भी यह बीमारी शुरू हो सकती है । लम्बे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहना भी इसका मूल कारण है ।

पाईल्स यदि खूनी हो चुका है तो तत्काल योग्य चिकित्सक से परामर्श करें एवं चिकित्सा के साथ साथ नियमित योग अपनाये । अपनी दिनचर्या एवं खानपान में सुधार करें तनाव से दूर रहें ।

यदि चिकित्सक आपको पाईल्स के ऑपरेशन की सलाह देते है तो उनके परामर्श के बाद ही साथ साथ मे पाइल्स के लिए योग करें । योग भी किसी प्रशिक्षित योगाचार्य की देखरेख में करें । 

पाइल्स के लिए योग-

  1. सूर्य नमस्कार 
  2. पश्चिमोतनासन
  3. हलासन
  4. मत्स्यासन
  5. सर्वंगासन
  6. पर्वतासन
  7. बालासन
  8. विपरित करनी आसन
  9. मालासन 
  10. पादहस्तासन
  11. पवनमुक्तासन
  12. अर्ध मत्स्येन्द्रासन
  13. शीर्षासन 
  14. मूलबंध आसन
  15. अश्विन मुद्रा 
  16. मर्कटासन 
  17. गोमुख आसान 


शवासन

  • भस्त्रिका,
  • कपालभांति,
  • बाह्यप्राणायाम,
  • अनुलोम विलोम,
  • भ्रामरी, उदगीथ,
  • उज्जायी,
  • ध्यान ,
  • योग निंद्रा 


कैसा हो आपका डाइट चार्ट -: 


सुबह दलिया खाएं ,अंकुरित अनाज ,मूंग दाल फलो का सलाद ,सेब पपीता ,अमरूद का सेवन नियमित करें । मिक्स आनाज की 2 रोटी खाये ।  दोपहर में दही या छाछ में से जो उपलब्ध हो उसका सेवन करें । 

शाम 4 बजे सब्जियों का सूप सेवन करने योग्य सब्जियों में से कोई भी सब्जी हो सकती है । रोज रात में खाने के बाद पपीता को भोजन में शामिल करें ।

इससे कब्ज में बेहद राहत मिलती है यह फल सस्ता भी होता है एवं आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है । त्रिफला चूर्ण पेट की बीमारी के लिए अमृतस्वरूप है।

रोग निवारण के लिए प्रतिमाह करीब 240 ग्राम त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन करना बेहद लाभदायक है । अनाज: गेहूं, जौ,शाली चावल ही भोजन का हिस्सा हो मैदा बिल्कुल न खाए ।

 
दाल: मसूर दाल, मूंग, गेहूं, अरहर। 

कौनसी दाले न खाए -: उड़द दाल, काबुली चना, मटर, सोयाबीन, छोले बिल्कुल न खाएं । 
फल एवं सब्जियां :- लहसुन, लौकी, तोरई,सहजन,टिण्डा, जायफल, परवल, करेला, कददू, मौसमी सब्जियां, चौलाई, बथुआ, अमरूद, आँवला, मूली के पत्ते, मेथी, साग, सूरन,जैसीं सब्जियों का ही प्रयोग करें ।

फाइबर युक्त भोजन ही करें । आलू, शिमला, मिर्च, कटहल, बैंगन, अरबी , भिंडी, जामुन, आड़ू ,कच्चा आम, केला, सभी तरह की मिर्च बिल्कुल न खाए । 


क्या भोजन में शामिल करें : जीरा, हल्दी, सौंफ, पुदीना, शहद,हल्का खाना, काला नमक, मट्ठा, ज्यादा पानी पीएं, गेहूं का ज्वारा, नींबू, हरड़, हींग।

एलोवेरा एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में ख्यात है । यह सूजनरोधक और चिकित्सकीय गुणों से बवासीर की जलन कम हो जाती है, और कब्ज की समस्या नहीं होती। खूनी बवासीर में एक गिलास पानी में सेब के सिरके का एक चम्मच डालकर दिन में दो बार पिएं। 

जैतून के तेल में रक्तवाहिकाओं में आई सूजन को कम करने का गुण होता है। जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाएं यह बहुत असरकारक है । 

आयुर्वेदिक औषधि के रूप में नारियल की जटाओं को जलाकर राख बना लें। इसे छानकर  ताजे मट्ठे में मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से पिएं। यह बहुत लाभकारी एवं बेहद कम खर्च में हो जाता है । 

घरेलू मसालों में प्रयोग जीरे का बबासीर में बहुत लाभ होता है । खूनी बवासीर में जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीस लें। इसे दिन में 2-3 बार 1-2 ग्राम की मात्रा में मट्ठे के साथ लें। यह जल्दी लाभ पहुंचाता है । 

एक गिलास छाछ में थोड़ा अजवाइन पाउडर, और एक चम्मच काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने में सेवन करें। यह अमृत के समान है । 

जल्दी जल्दी भोजन न करें । शांति पूर्वक भोजन करें । तला ,गला मसालेदार भोजन से पूरी तरह दूरी बना लें ।

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