Importance of yoga:योग का जीवन में महत्व

Importance of yoga in

 योग yoga  से न केवल रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि जीवन Importance of yoga in life जीने की कला भी सीखी जा सकती है

Importance of yoga in our life –

कोविड-19 के विषम समय में जब मनुष्य की सारी दिनचर्या Dailyrutin बेहद प्रभावित हुई है, मानसिक तनाव का स्तर बढ़ गया है । आर्थिक तंगी से हर दूसरा व्यक्ति प्रभावित है ।

योग एक विज्ञान है, जीवन जीने की कला है, जिसके जरिए प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को निरोगी एवं व्यवस्थित बना सकता है।
बीमार होकर योग करने की अनिवार्यता से अच्छा है पहले से योग करते रहें ताकि बीमारी से हम दूर रह सकें ।

योग व श्वसन क्रिया मानसिक तनाव को कम करने एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार 

Benefits of Yoga-

योग अपनाने का सबसे बेहतर समय आज इसी पल से है  हम नियमित प्राणायामों में भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति क्रिया, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी शीतली, सील्कारी, उज्जयी एवं ध्यान के द्वारा अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं । साथ ही अनेकों बीमरियों का जड़ से समाधान प्राप्त कर सकते है ।

नियमित आसन प्राणायामों के अभ्यास से हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। कोरोना वायरस भी हमारे श्वसन तंत्र पर ही प्रभाव डालता है।

अत: यदि हम रोजाना 30 से 45 मिनिट उक्त आसन प्राणायाम आदि का नियमित अभ्यास करेंगे तो कोरोना वायरस का हमारे शरीर पर प्रभाव नहीं होगा। लेकिन ध्यान रहें योग अभ्यास योग्य गुरु की देखरेख में ही करना चाहिए । अन्यथा योगा इंजरी होने का डर बना रहता है ।

योगसूत्र में महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग का वर्णन है। इसके यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि आदि योगों का पालन करते हुए हम निरोगी एवं स्वस्थ रह सकते हैं।

योग केवल शरीर का व्यायाम नही है बल्कि यह तो प्रत्येक स्तर पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालने वाला चमत्कार है ।

यम के द्वारा सामाजिक जीवन व नियम के द्वारा व्यक्ति का जीवन व्यवस्थित होता है। आसन व प्राणायाम द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। दैनिक जीवन में हम कुछ आसनों एवं प्राणायाम द्वारा अपने जीवन को स्वस्थ व संयमित रख सकते हैं।

नियमित योग क्लास धारण करते ही सुबह जल्दी उठने का नियम अपने आप बन जाता है । सुबह की व्यवस्थित शुरुआत होने से पूरा दिन अमृतमय लगता है ।

योग आज के दौर की संजीवनी बूटी है -:

योग के अन्तर्गत किये जाने वाले प्राणायाम, ध्यान, अजपाजप, शवासन, योगनिद्रा शरीर के पेरा सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम पर काम करके शरीर में होने वाले केमिकल असंतुलन को नियंत्रित करता है।

योग वैज्ञानिक रिसर्च पर आधारित जीवन शैली है । कोरोना काल मे लोग मानसिक अवसाद में बुरी तरह घिरे हुए हैं और बिना बीमारी के भी उन्हें लग रहा है कि कुछ बीमारी है।

ये मानसिक तनाव के लक्षण हैं, Importance of yoga in life ऐसे में योगिक क्रियाएं रीढ़ का संचालन, श्वसन क्रिया, अनुलोम विलोम रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद मददगार है ।

भारत मे बढ़ते आत्महत्या susite के प्रकरण योग से समाधान  -:

  • देश में 4 लाख लोग प्रतिवर्ष आत्महत्या का प्रयास करते है । भारत में हर 4 मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है । ये कहना गलत नही होगा कि हमारे देश में आत्महत्या ने एक महामारी का रुप ले लिया है ।
  • एनसीआरबी के मुताबिक भारत मे हर दिन 381 लोग आत्महत्या करते हैं, यानी हर एक घंटे में करीब 16 लोग अपनी जान ले लेते हैं ।
  • साल 2019 में कुल 1 लाख 39 हजार 123 लोगों ने आत्‍महत्‍या की, जो 2018 की तुलना में करीब 3.4 फीसद ज्‍यादा हैं ।यानी खुदखुशी करने वालों की संख्या बढ़ी है ।

  • देश में 6500 मनोरोग विशेषज्ञ हैं। ऐसे में एक लाख की आबादी पर 0.75 प्रतिशत मनोरोग विशेषज्ञ हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों से आज भी लोग काउंसिलिंग लेना सामाजिक दाग मानते हैं।

“योगों का अवान्तर विभाग”

लेखक – रितेश दुबे ,योग साधक
“काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी

देहार्द्धयोग:शिवयो: स श्रेयांसि तनोतु व:।
दुष्प्रापमपि यत्स्मृत्या जन: कैवल्यमश्नुते।।

साधन रूपी योग का जब विचार किया जाता है तब इस बात का अनुभव होता है कि शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक आदि सब दृष्टिकोण से बुद्धि पूर्वक विवेचन करने पर साधकों की अभिरुचि और सामर्थ्य में जो अनन्त भेद होते हैं उनके कारण स्वाभाविक और अनिवार्य अधिकारी भेद के अनुसार साधन प्रकार में भी विभिन्नताओं का होना संभव ही है।

इसलिए नर की नारायण के साथ एकीकार कराने वाला साधन भी सभी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता;बल्कि अपने-अपने अधिकार के अनुसार प्रत्येक साधक को अपने साधन का निश्चय करके उससे काम लेना होगा।

अत एव परम कल्याण के साधन रूपी योग अनेक प्रकार के होते हैं। हमारे शास्त्रों में उन सब का नाम योग ही पाया जाता है अर्थात जो जो साधन-सामग्री जीव को परमात्मा स्वरुप में पहुंचाने वाले किसी न किसी रास्ते पर या सीढ़ी पर चढ़ाने वाली हो या उससे तनिक आगे बढ़ाने वाली हो उसका योग(Importance of yoga in life) शब्द से निर्देश किया जा सकता है ,

और उनमें से भी जो साधना साधन सामग्री नर का नारायण स्वरूप में ही प्रतिष्ठित कर देती हो वही मुख्य वृत्ति से योग कहलाती है।

तथा जो जो साधन सामग्री इस काम में सहायक हो वह गौण कहलाती है। इसी प्रकार गौण तथा मुख्य विभाग से योगों में तारतम्य की बात होती है। इसके अतिरिक्त शास्त्र सिद्ध एवं युक्तियुक्त और अनुभव सिद्ध है कि एक रास्ते पर चलने वाले साधकों के लिए जिन अन्य साधनों की आवश्यकता पड़ती है उनमें भी आनुपूर्वी का हिसाब करना पड़ता है।

तथा साधकों को शास्त्र निर्दिष्ट मार्ग से अधिकारी भेदादि के विचार से उस उस साधक के लिए कल्याणकारी बताया गया है। इन्हीं सभी कारणों से योग में अधिकारी भेद एवं आनुपूर्वी विभेद के कारण विभिन्न स्वरूप बताए गए हैं।

उदाहरणार्थ

क्रियायोग ,समाधियोग, मन्त्रयोग, लययोग,वाग् योग ,प्राचीन (मार्कण्डेयी) हठयोग, नवीन (मत्स्येंद्रनाथी) हठयोग, कुलकुंडलिनी योग ,अकुलकुंडलिनी योग,शब्द योग, स्पर्श योग ,संयोगयोग ,श्रद्धा योग ,भक्ति योग, प्रेम योग ,शरणागत योग ,कर्म योग ,अभ्यास योग, ध्यान योग,ज्ञान योग ,राजयोग, राजाधिराजयोग ,पूर्ण योग आदि अनेकानेक योगों का विभिन्न स्वरूपों का वर्णन ग्रंथों में प्रायः देखने को मिलता है।

।। श्रीहरि:।।

लेखक – रितेश दुबे ,योग साधक
“काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी

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