{ ॐ क्या है }-ॐ उच्चारण के लाभ व विधि

ॐ क्या है,ॐ उच्चारण के लाभ Om Chanting Benefits

ॐ उच्चारण के लाभ Om Chanting Benefits -:

  • ॐ मंत्र का उच्चारण जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से मिलकर निकलने वाली वायु के संयुक्त प्रभाव से ही यह उच्चारण हो पाता है ।
  • ॐ के उच्चारण के समय निकलने वाली ध्वनि सभी चक्रों से टकराती हुई निकलती है साथ ही हार्मोन्स स्त्रावित करने वाली ग्रन्थियों से भी यह ध्वनि टकराती हुई आती है ।
  • जिस कारण हार्मोन्स नियंत्रण एवं बीमारियों पर नियंत्रण प्राप्त होता है । दिल की धड़कन और रक्तसंचार सुव्यवस्थित होता है । सबसे प्रमुख लाभ नियमित ॐ उच्चारण करने से मानसिक बीमारियाँ दूर होती हैं।
  • ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा उत्पन्न होता है जो कि थायरायड ग्रन्थि पर सकारात्मक असर उत्पन्न करता है । चुकी थायरॉइड ग्रन्थि हमारे गले मे पाई जाती है वहां कम्पन्न होने से थायराइड रोग से पीड़ित रोगी को ठीक होने में मदद मिलेगी ।
  • यदि आपको बराबर नींद नही आती है तो बेड पर जाने के पूर्व ॐ का उच्चारण अवश्य करें । यह मन को शांत करके आपको नींद की ओर ले जाएगा ।
  • वैज्ञानिक परीक्षण में सिद्ध हुआ है कि ॐ के उच्चारण से मृत कोशिकाओं को नया जीवन मिलता है । साथ ही शुगर ,बीपी ,अनिंद्रा ,डिप्रेशन में ॐ का उच्चारण वरदान साबित होता है ।
  • ॐ का उच्चारण से शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर किया जा सकता है , अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है । ह्रदय की धड़कन को नियंत्रित करने में ॐ मंत्र का उच्चारण बहुत लाभ दायक है ।
  • मूड स्विंग होने की समस्या को भी इसके उच्चारण से ठीक किया जा सकता है । ॐ का नियमित रूप से उच्चारण करने से व्यक्ति की शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक सेहत भी बेहतर होती है।

ॐ क्या है -:

अ उ म इन 3 शब्दों से मिलकर ॐ बना है उपनिषद में इसे त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना गया है । यह भू: लोक, भूव: लोक और स्वर्ग लोग का प्रतीक भी है।

अ का अर्थ होता है उत्पन्न होना, उ का अर्थ होता है उठना यानी विकास और म का अर्थ होता है मौन हो जाना यानी कि ब्रह्मलीन हो जाना ।

ॐ के अंदर स्थित यह 3 शब्द शरीर के अलग अलग हिस्सों में कम्पन उत्पन्न करते है । जैसे की ॐ में स्थित पहला शब्द ‘अ’:- शरीर के निचले हिस्से में (पेट के करीब) कंपन उत्पन्न करता है ।

ॐ में उपस्थित दूसरा शब्द ‘उ’– शरीर के मध्य भाग में कंपन उत्पन्न करता है जो की (छाती के करीब) । ॐ में स्थित 3 शब्द ‘म’ से शरीर के ऊपरी भाग में यानी (मस्तिक) कंपन उत्पन्न होता है ।

ॐ उच्चारण करने की विधि -:

सुबह सूर्योदय के समय या शाम को आप एक शांत जगह पर सुखासन में बैठ जाये । साँसों गहराई तक लेकर एवं उन्हें छोड़ते हुए ॐ का उच्चारण शुरू करें । ओ शब्द को बोलते समय नाभि में कम्पन महसूस करें । इसे ऊपर की ओर चढ़ता हुआ महसूस करें । ऊपर जाकर जैसे ही कम्पन्न गले तक पहुंचे ध्वनि को म की ध्वनि में परिवर्तित कर दें । कम्पन्न तब तक महसूस करें जब तक सिर में कम्पन्न महसूस न हो ।

योग क्लास व में ॐ का उच्चारण अनिवार्य होता है -:

योग क्लास व सूर्यनमस्कार करते वक्त ॐ का उच्चारण अनिवार्य क्यों होता है

बिना ॐ के सृष्टि की कल्पना नही की जा सकती है ॐ का उच्चारण शुरू करते ही शरीर मे कम्पन शुरू हो जाता है । माण्डूक उपनिषद् में बताया गया है कि ॐ यह अमर शब्द ही पूरी दुनिया है । छंदोग्य उपनिषद के अनुसार ॐ ब्रह्म रूपी शाश्वत चेतना है।

योग के प्रचलित ग्रन्थ पतंजलि योग सूत्र में ॐ की उपासना से ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता बताया गया है । शास्‍त्रों के अनुसार ॐ शब्‍द को आदि योगी भगवान शिव का अति प्रिय शब्द माना गया है।

भारतीय संस्कृति में ॐ के महत्व से हम सभी भलीभांति परिचित है । योग क्लास में भी नियमित मैं ॐ का उच्चारण करवाता हूँ । कुछ दिन पूर्व एक विद्यार्थी ने कौतूहलवश मुझसे पूछा कि गुरुजी आखिर आप रोज ॐ का उच्चारण कराते है ।

इसके लाभ क्या है ? आप अपनी हर बात के पीछे वैज्ञानिक आधार बताते है । आखिर ॐ के उच्चारण के पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है ? प्रश्न बहुत लाजवाब था क्योंकि इसी प्रश्न से आज के लेख को लिखने की प्रेरणा मिली ।

आज का मानव बिना फायदे के कोई काम नही कर सकता यह तो सर्व विदित है और योग से यदि आमजन को फायदा नही मिलता तो आज 200 से ज्यादा देश योग को स्वीकार भी नही करते ।

केवल भारतीय संस्कृति है यह मानकर भारतीय स्वीकार कर भी लेते लेकिन पूरी दुनिया स्वीकार नही करती । आज कोई किसी भी धर्म का हो वो ॐ का उच्चारण कर रहा है ।

में जब क्लास लेता हूँ तो उसमे अलग अलग धर्म संप्रदाय के लोग जुड़े हुए है वे सब ॐ का उच्चारण करते है और इसके लाभ को महसूस कर पाते है ।

ॐ को किसी धर्म से नही जोड़ा जा सकता क्योंकि ॐ तो संपूर्ण ब्रह्मण्ड है । जैसे सूर्य का कोई धर्म नही होता ,धरती माता का कोई धर्म नही होता ठीक उसी तरह ॐ भी सर्वज्ञ है ।

ॐ अनंत है ।ॐ का न प्रारम्भ है न अंत है । शंख की ध्वनि को ध्यान से सुनने पर उसके अंदर भी ॐ मंत्र सुनाई देता है ।

उद्गीत प्राणायाम -:

ॐ के उच्चारण को जब सांसों के साथ किया जाता है गहराई तक सांस लेकर छोड़ते वक्त ॐ का उच्चारण किया जाता है तो यह उद्गीत प्राणायाम कहलाता है ।

ॐ संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है -:

ॐ के 100 से ज्यादा अर्थ है । संपूर्ण आकाशगंगा इसी तरह विस्तारित है । यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है । यह किसी वस्तु के टकराने की ध्वनि नही है यह तो अनाहत है ।

ॐ उच्चारण से मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा -:

जब ध्यान की गहरी अवस्था मे पहुंचते है तो शरीर के भीतर भी ओर शरीर के बाहर भी एक ध्वनि सुनाई देती है । यही ध्वनि ॐ है । इसे सुनते रहने से मन और आत्मा दोनों शांत होती है ।

हमारे ऋषि मुनि यह बात हमे वर्षो पूर्व बता चुके है । एक साधारण मनुष्य कभी ध्यान में जाकर उस अवस्था तक नही जा पाता लेकिन यदि वो ॐ का उच्चारण करता है ।

तो उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित होता है । जो ध्यान पूर्वक इस ध्वनि को सुनता है वो ईश्वर के निकट स्वयं को महसूस करने लगता है ।

कितनी देर कब करना चाहिए ॐ का उच्चारण -:

कम से कम 6 मिनट तो प्रत्येक मनुष्य को ॐ का उच्चारण करना चाहिए । जो ॐ के उच्चारण से रोगों को ठीक करना चाहते है उन्हें 21 या 40 मिनट तक ॐ का उच्चारण करना चाहिए ।

किसी भी तरह के तनाव में 6 मिनट तक ॐ का उच्चारण करने से तुरन्त तनाव से मुक्ति मिलती है ।

लेखन -: योग गुरु डॉ.मिलिन्द्र त्रिपाठी (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ )

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