Surya Namaskar: आसन, मंत्र, महत्व और फायदे

Surya-Namaskar-सूर्य-नमस्कार

स्वस्थ रहने के लिए जितनी शुद्ध हवा आवश्यक है, उतना ही प्रकाश भी हमारे लिए आवश्यक है इसीलिए कहा जाता है कि सूर्य के प्रकाश और Surya Namaskar में मनुष्य शरीर के कमजोर अंगों को फिर से बलशाली और ऊर्जावान बनाने की अद्भुत क्षमता है।

सूर्य एक प्राकृतिक चिकित्सालय है। सूर्य के प्रकाश का प्राकृतिक चिकित्सा में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है । यदि हम पिरामिड में देखते है तो हमे सूर्य की जो सप्तरंगी किरणे दिखाई देती है उनमें अद्भुत रोगनाशक शक्ति है।

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सूर्य नमस्कार विज्ञान –

सुबह से शाम तक सूर्य अपनी किरणों से न सिर्फ हमे प्रकाश देता है बल्कि, इसमे औषधीय गुणों का अपार भंडार है, सूर्य का प्रकाश अनेक रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं का नाश करता है।

सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से ही कीटाणुओं का अंत हो जाता है

यही कारण है कि हमारे कपड़ों को हम धूप में डालते है ताकि उनमें किसी भी तरह के कीटाणु होने पर वे स्वत: नष्ट हो जाये ।


आपार ऊर्जा का भंडार होने के साथ साथ सूर्य साक्षात नजर आने वाले भगवान माने जाते है । सूर्य भगवान हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है । भारत को सूर्य उदय का देश कहा जाता है ।

भारत मे सूर्य उदय पर सूर्य भगवान को जल चढ़ाने की परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है । सूर्य को जल चढ़ाना सिर्फ पोराणिक मान्यताओं पर आधारित नही है ।

बल्कि सूर्य को जल चढ़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण है कि जब हम सूर्य को जल चढ़ाते हैं तो इससे हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।

सूर्य नमस्कार कब और केसे करे-

सुबह की ताजी हवा और सूर्य की पहली किरणें हम पर पड़ती हैं। सूर्य की किरणों से हमे विटामिन डी प्राप्त होता है ।

जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी एवं अत्यंत आवश्यक है। सूर्य को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सूर्य की किरणें शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को हटाकर शरीर को निरोगी बनाने में मदद करती है।

सुबह के समय उगते सूर्य को जल चढ़ाते समय पानी की धारा के बीच सूरज को देखते हैं तो नेत्र ज्योति तेजी से बढ़ती है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सभी ग्रहों का स्वामी कहाँ गया है । उनकी आराधना का विशेष महत्व बताया गया है ।

सूर्य आराधना का वैज्ञानिक आधार -:

हम सभी जानते है कि सूर्य में सात रंग की किरणें हैं। इंद्रधनुष में भी यही 7 रंग दिखाई देते है । इन सप्तरंगी किरणों का प्रतिबिंब जिस किसी भी रंग के पदार्थ या वस्तु पर पड़ता है,

वहां से यह किरणे पुन: वापस लौट जाती हैं लेकिन काला ही ऐसा रंग है जिसमें से सूर्य की किरणें वापस नहीं लौटतीं।

इसीलिए गर्मियों में काले रंग के कपड़े पहनने से मना किया जाता है । हमारे शरीर में भी अलग-अलग रंगों की विद्युत किरणें होती हैं,

अत: जिस रंग की कमी हमारे शरीर में होती है, सूर्य के सामने जल डालने यानी अर्घ्य देने से वे उपयुक्त किरणें हमारे शरीर को प्राप्त हो जाती हैं ।

हमारे शरीर मे होने वाली कमियों को सूर्य को जल चढ़ाने मात्र से दूर किया जा सकता है । चुकी आंखों की पुतलियां काली होती हैं, जहां से सूर्य की किरणें वापस नहीं लौटतीं, अत: वहां होने वाली किसी भी तरह की कमी पूरी हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि सूर्य की किरणों का प्रभाव जल पर बहुत जल्दी पड़ता है, इसलिए सूर्य को अभिमंत्रित जल का अर्घ्य देते समय तांबे के पात्र को सिर से भी ऊपर ले जाकर सूर्य को जल में से देखते हुए अर्ध्य दिया जाता है।

मकर संक्रांति पर योग साधक क्या करें -:

सुबह सूर्य उदय के समय पहले सूर्य भगवान को पूरी रीति रिवाज एवं पूजन पद्धति के साथ जल का अर्ध्य अर्पण करें । उसके बाद पूर्व दिशा की ओर मेट बिछाकर 12 मन्त्रो एवं 12 आसानो के साथ सूर्य नमस्कार कर सूर्य देवता की आराधना करें ।

संक्रांति पर यह आराधना आप अपनी घर की छतों पर आसानी से कर सकते है ।

कैसे करें सूर्य नमस्कार -:

गलत सूर्य नमस्कार करना आपके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है । 12 आसानो का अभ्यास एक साथ करने के लिए आपको पहले सूर्य नमस्कार के 12 आसानो को अलग अलग सही तकनीक से सिख लेना चाहिए ।

किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में आप यह अभ्यास सिख सकते है । सही तरीके से किये गए सूर्य नमस्कार से ही आपको पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होगा । सूर्य आराधना विशिष्ट मन्त्रों के साथ श्वास-प्रश्वास को संतुलित करते हुए की जाती है ।

12 आसानो में किस जगह सांस लेनी है छोड़नी है एवं कहाँ कहाँ सांस को रोकना है उसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है ।सूर्य नमस्कार शुरू करने के पहले कुछ देर सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करना बेहतर माना गया है ।

Surya Namaskar Steps -:

अपनी योगा मेट पर पहले सीधे सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाये और दोनों हाथ प्रणाम करने की मुद्रा बनाये तथा सांसों को सामान्य रखें।

हस्त उत्तानासन -:


दूसरी स्थिति में श्वास भरते हुए (INHALE) दोनों हाथों को ऊपर की तरफ ले जाए अब दोनों हाथों को कानों के पास सटाते हुए पीछे की तरफ झुकें।इससे फेफड़ो की लम्बी सांस लेने की क्षमाता बढ़ती है ।

पाद हस्तासन-

तीसरी स्थिति में श्वास छोड़ते हुए (EXHALE) करते हुए आगे की तरफ नीचे झुकते हुए हम अपने दोनों हाथों से अपने पैर के अंगूठे को पकड़ते हैं ।

अश्व संचालन आसन -:

चौथी स्थिति में श्वास भरते हुए (INHALE) हाथों को जमीन पर टिकाकर सांस लेते हुए बांए पैर को पीछे की ओर ले जाएं और दांये पैर को घुटने से मोड़ते हुए छाती के दाहिने हिस्से से सटाएं उसके बाद सीने को आगे खीचते हुए गर्दन को ऊपर उठाएं।

  • दृष्टि आकाश की तरफ होनी चाहिए।
  • मेरूदंड सीधा और लम्बवत रखना चाहिए।

पर्वतासन -:


पांचवें आसन में श्वास छोड़ते हुए, दाए पैर को पीछे ले जाएं। श्वास भरकर कमर और नितम्ब का भाग ऊपर उठाएं गर्दन को नीचे झुकाकर कंठ से चिपकाने का प्रयास करें ।

इस दौरान दोनों पैरों की एड़ियां जमीन पर आपस में मिली होनी चाहिये। इस आसन में शरीर पर्वताकार स्थिति में होता है। इस स्थिति में यथाशक्ति रुके और श्वास को स्थिर(HOLD BREATH) रखें।


शरीर को पीछे की ओर खिंचाव दीजिए और एड़ियों को जमीन पर मिलाकर गर्दन को झुकाइए नाभि की दिशा में देखिए ।

अष्टांग नमस्कार -:

छठें आसन में श्वास लेते हुए शरीर को जमीन के बराबर में साष्टांग दंडवत करें । घुटने, छाती, नाक को जमीन से स्पर्श करें, ध्यान रहे सिर्फ स्पर्श करना है जमीन पर लेटना नहीं है।

थोड़ी देर इस अवस्था में रुकें। फिर जांघों को थोड़ा ऊपर उठाते हुए सांस को छोडें।

भुजंगासन -:


सातवें स्थिति में श्वास भरते हुए गर्दन को ऊपर उठाएं इसी स्थिति में फुफकार मारते हुए श्वास को मुंह से छोड़े। यह कोबरा पोज कहलाता है । श्वास भरते हुए हाथ के बल शरीर को पेडू(पेल्विक) तक ऊपर उठाते है। दृष्टि आकाश की तरफ रखे।

पर्वताआसान -:

आठवें आसन में पांचवी स्थिति जैसी मुद्रा बनाएं। इसमें श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हुए नितम्ब को ऊपर उठाएं नाभि को देखे, दोनों एड़ियां आपस में मिली हुई और जमीन को स्पर्श करती हुई स्थिति में और

दोनों हाथ जमीन पर रखते हुए गर्दन नाभि की दिशा में श्वास को स्थिर करें।

अश्व संचालन आसन-


इस स्थिति में चौथी स्थिति के जैसी मुद्रा बनाएं।नौंवीं स्थिति में श्वास भरते हुए ध्यान रहें अबकी बार बांये पैर को आगे की ओर रखें एवं दाएं पैर को पीछे की ओर ले जाये ।

चेस्ट को खींचकर आगे लाये, गर्दन को पीछे की तरफ ले जाए,टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। कुछ देर स्थिर(HOLD) हो।

पाद हस्तासन-


वापस तीसरी स्थिति में सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। दसवीं स्थिति में श्वास छोड़ते हुए बाएं पैर को दाए पैर के पास रखे, कमर तक खड़े होकर सिर नीचे की तरफ झुकाए, दोनों हाथो को पैरों के पंजे के पास रखें।

ध्‍यान रखें कि घुटने सीधे रहें और माथा घुटनों को स्पर्श करना चाहिए। कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें।

हस्त उत्तानासन -:


यह स्थिति दूसरी स्थिति के समान हैं।
ग्यारहवी स्थिति में श्वास भरते हुए, दोनों हाथो को ऊपर की तरफ ले जाए और पीछे की तरफ यथाशक्ति झुकें।

नमस्कार आसान -:

यह स्थिति पहली मु्द्रा की तरह है अर्थात नमस्कार की मुद्रा।
बारहवी स्थिति में श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को प्रणाम की स्तिथि में वापस लाएं।

सूर्य नमस्कार मंत्र(surya namaskar Mantra)-

प्रत्येक आसान के साथ एक मंत्र का जाप करें उसी क्रम में मंत्र का जाप करें उसी क्रम में आसान करें ।

  1. ॐ मित्राय नमः,
  2. ॐ रवये नमः,
  3. ॐ सूर्याय नमः,
  4. ॐ भानवे नमः,
  5. ॐ खगाय नमः,
  6. ॐ पूष्णे नमः,
  7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः,
  8. ॐ मरीचये नमः,
  9. ॐ आदित्याय नमः,
  10. ॐ सवित्रे नमः,
  11. ॐ अर्काय नमः,
  12. ॐ भास्कराय नमः
    ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः

इन बारह आसनों का अभ्यास एक चक्र (आवृत्ति) कहा जाता है। धीरे-धीरे इनका अभ्यास करें और प्रतिदिन एक आवृत्ति बढ़ाते जाए, बारह आवृत्ति तक अभ्यास करें।

सूर्य नमस्कार क्यो बेहद महत्वपूर्ण और लाभकारी है -:

सूर्य नमस्कार सुबह के समय खाली पेट करें । व्यस्तता के कारण आप यदि सुबह नही कर सकते है तो दोपहर या शाम को भी कर सकते है परंतु ध्यान रहें खाना खाने के बाद 3 घण्टे का अंतराल होना आवश्यक है ।

आसन करते हुए शरीर पर ज्यादा जोर न डाले जितना सहजता से शरीर आसन कर सकें, सिर्फ उतना ही करें।

सूर्य नमस्कार की गणना-

जब आप लगातार 12 सेट सूर्य नमस्कार के करते हैं 12सेट X हर सेट में 2 चक्र X हर चक्र में 12 आसन = कुल आपके 288 आसन एक साथ हो जाते है , वो भी सिर्फ़ 12-15 मिनटों में।एक सामान्य भार के व्यक्ति के लिए एक सूर्य नमस्कार के समय 13.9 कैलोरी ऊर्जा का उपयोग होता है।

30 मिनट सूर्य नमस्कार करना किसी भी व्यायाम से ज्यादा प्रभावशाली होता है । क्योकि 30 मिनट सूर्य नमस्कार करने पर लगभग 417 कैलोरी का उपयोग होता है ।

सूर्य नमस्कार के लाभ(Surya Namaskar Benefits in hindi) -:

सूर्य नमस्कार के लगातार अभ्यास से मणिपुर चक्र विकसित होता है। जिससे व्यक्ति की रचनात्मकता और अन्तर्ज्ञान बढ़ते हैं। सूर्य नमस्कार से आज बढ़ता है । यही कारण था कि प्राचीन ऋषियों ने सूर्य नमस्कार के अभ्यास के लिए इतना बल दिया।


इसके लगातार एवं सटीक अभ्यास से एकाग्रता बढती है और मेरुदंड (स्पाइनल कार्ड) में लचीलापन आता है । साथ ही जोड़ों के दर्द ठीक करने में मोटापा खत्म करने में बहुत लाभदायक होता है । शरीर में रक्त का संचार शुद्ध होता है।

लगातार अभ्यास से कब्ज की शिकायत दूर होती है। सीना, हाथ और शरीर के सारे अंगों को मजबूती मिलती है । मन्त्रो का मन मे जाप करते हुए करने से मानसिक शांति मिलती है।

सूर्य नमस्कार विभिन्न आसनों का योग है इसका प्रभाव सभी अंत ग्रंथियों (Endocrine Glands)पर पड़ता है और शरीर के शक्तिचक्र सक्रीय होते हैं।

कुंडली जागरण में भी इसका महत्व है । इससे पूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।सूर्य नमस्कार से एंडोक्राइन ग्लैंड्स खासकर थॉयरायड ग्लैंड की क्रिया नॉर्मल होती है ।

सूर्य नमस्कार से वजन भी कम होता हे.

सावधानियां -:


गर्भवती महिला ,हर्निया, पीठ दर्द की समस्या से ग्रस्तबऔर उच्च रक्ताचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार नहीं करने की सलाह दी जाती है ।महिलाएं पीरियड के दौरान सूर्य नमस्कार और अन्य आसन न करें ।

लेखन -: योगाचार्य डॉ.मिलिन्द्र त्रिपाठी (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ )

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