Yoga For Slip Disc in hindi – स्लिप डिस्क के दर्द से राहत दिलाने वाले योग

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स्लिप डिस्क Slip Disc को हर्निएटेड डिस्क या बल्गिन डिस्क भी कहा जाता है। लगातार गलत तरीके से बैठना ,क्षमता से अधिक भारी वजन उठाना ,जिम की एक्सरसाइज से एवं बढ़ती उम्र के कारण स्लिप डिस्क जैसी भयानक दर्दभरी उलझन शुरू होती है । स्लिप डिस्क के दर्द को योग Yoga For Slip Disc के माध्यम से कम किया जा सकता हे.

जो आपके जीवन को नरक तुल्य बना देती है । परेशान व्यक्ति न ठीक से बैठ पाता है न चल पाता है न ही गाड़ियों की यात्रा कर पाता है । शने शने यह दर्द इतना भयानक रूप ले लेता है कि दर्द वाला व्यक्ति कहरा उठता है ।

ऑपरेशन ही नही योग से उपचार है संभव -:

स्लिप डिस्क के लिए योग आपकी रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों और स्नायुबंधन (ligaments) को मजबूत करने में मदद करता है।अपनी पीठ को योग के दौरान ज़्यादा न घुमाएं।

पीठ के दर्द में कभी सीधे घुटनों के साथ 90 डिग्री आगे न झुकें।नियमित योग अभ्यास से न सिर्फ रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है बल्कि स्लिप डिस्क से राहत भी मिलती है लेकिन यहां भी यह बात लागू होती है कि आपके योगा टीचर अनुभवी एवं प्रशिक्षित हो ।

जो आपकी क्षमताओं आपकी बीमारी को ध्यान में रखकर आपको योग करवाएं ।

Yoga For Slip Disc स्लिप डिस्क में फायदेमंद योग -:

  1. उष्ट्रासन
  2. शलभासन योग
  3. भुजंगासन
  4. मकरासन
  5. ज्येष्टिकासन
  6. अदरवासना
  7. सेतुबंधासन
  8. कटी उत्तानासन
  9. ऊपर वर्णित आसानो के अभ्यास हो जाने के बाद निम्न आसान करें ।
  10. चक्रासन
  11. अर्ध-शलभासन
  12. मार्जरी आसन
  13. धनुरासन
  14. शवासन

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स्लिप डिस्क को विस्तार से जानिए -:

  • 33 हड्डियों से मिलकर बना समूह भी कहा जा सकता है। इन हड्डियों को सपोर्ट देने का काम डिस्क करती हैं। असल मे जिसे हम स्लिप डिस्क कहते है । ये डिस्क हमारी हड्डियों को रोज के रूटीन में लगने वाले छोटे बड़े झटकों से बचाने में मदद करती हैं।
  • ये झटके हमें चलने, वजन उठाने, मुड़ने, दौड़ने या चीजों को पकड़ने के दौरान लग सकते हैं। कई बार रीढ़ का जेली वाला हिस्सा बाहरी डिस्क से बाहर निकल आता है। जिसे ही स्लिप डिस्क कहा जाता है ।

स्लिप्ड डिस्क को जानने के लिए रीढ की पूरी बनावट को उसके विज्ञान को समझना आवश्यक है। आप सभी जानते है की स्पाइनल कॉर्ड या रीढ की हड्डी पर शरीर का पूरा वजन टिका होता है।

यह शरीर को गति देती है और पेट, गर्दन, छाती और नसों की सुरक्षा करती है। एक तरह से बहुत आवश्यक कार्यो को अंजाम देने में मदद करती है ।स्पाइन वर्टिब्रा से मिलकर बनती है। यह सिर के निचले हिस्से से शुरू होकर टेल बोन तक होती है। इस कारण इसका स्वास्थ्य होना बहुत जरूरी है ।


स्पाइन कॉर्ड की हड्डियों के मध्य कुशन की तरह एक मुलायम चीज होती है, जिसे हम डिस्क कहते है। ये डिस्क आपस मे एक-दूसरे से जुडी होती हैं और वर्टिब्रा के बिलकुल बीच में स्थित होती हैं।

यह हमारे शरीर की सरंचना में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है । डिस्क स्पाइन के लिए शॉक एब्जॉर्बर का काम करती है।

Slip Disc होने का कारण -:

छोटे कारणों से भी होता है बड़ा नुकसान तेज गति से गाड़ी चलाना आज के युवाओ का शौक है । तेज स्पीड की स्पोर्ट्स बाइक या कार में बहुत तेज स्पीड में अचानक ब्रेक लगाने पर भी अनेक लोग स्लिप डिस्क की चपेट में आ रहे है । अचानक ब्रेक लगाने से शरीर को जोर का झटका लगता है और डिस्क को चोट लग सकती है।

स्लिप डिस्क का एक ओर बड़ा कारण है लेकिन लोग उसे नजर अंदाज करते है सिगरेट ,बीड़ी पीने के कारण रीढ़ की हड्डी की डिस्क में ऑक्सीजन की सप्लाई घट जाती है । जिसके कारण भी स्लिप डिस्क होती है ।

भारत मे स्लिप डिस्क से पीढ़ित कुल लोगो की संख्या में आबादी में 80 % है -:

पहले इसे बुजुर्गों की बीमारी कहाँ जाता था लेकिन भारत मे जिम के बढ़ते चलन ओर गलत रहन सहन की आदत ने भारत के युवाओं को इस घातक बीमारी ने जकड़ लिया है ।

जिनकी औसत उम्र 22 से 40 के मध्य है । शुरू में सामान्य कमरदर्द से शुरू हुआ यह सफर भयानक कमर दर्द में बदल जाता है । मेरी योग क्लास में आने वाले स्लिप डिस्क के मरीजो में बड़ी संख्या युवाओ की है जो पहले जिम जाया करते थे ।

उनका कहना है कि भारत मे जिम ट्रेनर तकनीकी रूप से सक्षम नही होते यहां तक कि अधिकांस जिमो में तो ट्रेनर की एजुकेशन ही माध्यमिक स्कूलों तक कि रहती है ।

शरीर विज्ञान से उनका दूर दूर तक कोई नाता नही रहता है जिसका खामियाजा जिम जाने वाले युवाओं को बाद में भुगतना पड़ता है । भारत में किसी भी जिम में जाने वाले युवा जिम ट्रेनर के प्रशिक्षित होने या न होने की जानकारी निकाले बिना ही जिम में प्रवेश ले लेते है । बाद में उन्हें इसका भुगतान अपनी शरीर की जीवन भर की परेशानी के रूप में करना पड़ता है ।

Yoga For Slip Disc: स्लिप डिस्क के दर्द से राहत दिलाने वाले योग व उपाय -:

स्लिप डिस्क का दर्द रीढ़ की हड्डी से जुड़ा हुआ है । जिसमें स्पाइन के पास की हड्डियों में मौजूद जेली जैसा पदार्थ बाहरी छल्लों से बाहर निकलता है। ये स्थिति हड्डियों में खराबी आने या चोट लगने की वजह से भी हो सकती है।

भारत मे 45 % लोग कमर दर्द को सामान्य मानकर नजर अंदाज करते है । फिर बाद में यह विकराल रूप धारण कर लेती है । हमारी रीढ़ की हड्डी या स्पाइन असल में कोई एक हड्डी नहीं कहलाती है।

ज्यादातर ये समस्या कमर के निचले हिस्से या लंबर डिस्क नंबर 14, 15 s1 में होती है। जो जांच के बाद ही पता चलती है । शरीर मे 30 की उम्र के बाद कैल्शियम की कमी हो जाने से भी यह समस्या जन्म लेती है ।

अनेक बार लोग ऑफिस में कम्प्यूटर या स्मार्ट फोन पर गलत तरीके से घण्टो बैठे रहते है जिसके कारण यह समस्या जन्म लेती है । मोटापे को अनेक रोगों की माता कहा गया है । अधिक वजन के कारण भी स्लिप डिस्क होती है ।

सुस्त जीवन शैली के कारण भी यह समस्या हो सकती है । गलत तरीके से सोने से भी यह समस्या होना आम है । किसी भारी समान को गलत तकनीक से उठाना भी रीढ़ की हड्डी के लिए नुकसानदेह होता है ।

बहुत ज्यादा ड्राइविंग करना भी स्लिप डिस्क के प्रमुख कारणों में शुमार है । इसके कारण शरीर के अनेक हिस्से सुन्न हो सकने की समस्या का भी सामना करना पड़ता है । एक ही स्थान पर ज्यादा देर खड़े होने या बैठने से भी यह समस्या होती है ।

स्लिप डिस्क बीमारी नही है -:

असल मे स्लिप डिस्क बीमारी न होकर शरीर की मशीनरी में तकनीकी खराबी मात्र है।जिसे योग के माध्यम से ठीक किया जा सकता है । परंतु ध्यान रहे नियमित सही योग करने से ही लाभ होगा ।

लेखन -: योग गुरु डॉ.मिलिन्द्र त्रिपाठी (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ )

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